मैरियन भक्ति
अल्टोटिंग की हमारी लेडी
बवेरिया की काली मैडोना
बवेरिया के मध्य में, समय के साथ धुंधली पड़ चुकी एक छोटी सी प्रतिमा को बवेरियावासियों की माता और रानी के रूप में पूजा जाता है। इसके चैपल के चारों ओर सदियों पुरानी कृपाओं को बयां करने वाली भेंटें रखी हैं।

उत्पत्ति और इतिहास
अल्टोटिंग में मैरी के प्रति श्रद्धा का इतिहास मध्य युग से जुड़ा है, लेकिन इस तीर्थस्थल की प्रसिद्धि 1489 में हुए एक चमत्कार से जुड़ी है: एक डूबे हुए बच्चे को वर्जिन मैरी की प्रतिमा के सामने लाया गया और उसके परिवार की प्रार्थनाओं के बाद वह जीवित हो उठा। तब से, ईश्वर की कृपा और मन्नतें बढ़ती गईं, जिससे अल्टोटिंग जर्मनिक जगत के महान मैरी-भक्ति केंद्रों में से एक बन गया।
वर्तमान छवि एक छोटी लकड़ी की नक्काशी है, जो समय और मोमबत्ती के धुएं से धुंधली हो गई है, इसलिए इसका नाम "अल्टोटिंग की काली मैडोना" रखा गया है। चैपल के चारों ओर सैकड़ों कृतज्ञता पट्टिकाओं से सजी दीर्घाएँ हैं। संत जॉन पॉल द्वितीय और बेनेडिक्ट सोलह (जो बवेरिया के थे) ने इस तीर्थस्थल की यात्रा की थी।
क्या आपके शहर में वर्जिन मैरी के प्रति श्रद्धा की कमी है?
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